नही रहे भोजपुरी के गीतो को माटी की खुशबु देने वाले -गीतकार विभाकर पांडे

: जब गीतों से आने लगी मिट्टी की ख़ुशबू
पंकज साहनी, वराणसी




'मोहब्बत कर गईल अखिया ना धड़कन के खबर लागल ....

भले ही इस खूबसूरत गीत को वजूद में आए 2 साल गुज़र गए हों, लेकिन इसकी तासीर आज भी मोहब्बत बिखेरे हुए है।
यह महज़ एक गीत का जन्म ही नहीं था, बल्कि भोजपुरी सिनेमा में एक ऐसे दौर का आग़ाज़ था, जिसने गीतों में लोक संगीत और मिट्टी की खुशबू भर दी। संगीत की दुनिया में एक ऐसे दिवाकर का उदय हो चुका था, जिसकी रौशनी सतरंगी थी और यह दिवाकर थे मशहूर गीतकार विभाकर पांडे...विभाकर ने ज़मीन से जुड़े लोगों की आम भाषा के शब्दों को जब गीतों में पिरोकर उन्हें वापस किया, तो श्रोताओं को उसमें एक अपनापन लगा। उस वक्त मिट्टी से भरपूर गीतों का बभोजपुरी में बोल बाला था, बावजूद इसके उन्होंने हल्के-फुल्के शब्दों से वज़नदार नग़मों को लोकप्रिय बनाया। भले ही उनके गीतों में उर्दू के शायराना शब्दों की कमी हो, लेकिन मोहब्बत की नज़ाकत और दर्द का अहसास कहीं से भी कम नहीं होता। उनके गीतों से श्रोता आसानी से राब्ता कायम कर लेता है। क्या गांव, क्या गली, क्या डगर, क्या शहर, जहां भी  विभाकर पांडे के गाने गूंजे, फ़िज़ा की रंगत ही बदल गई।
भोजपुरी सिनेमा  में क़रीब दशकों तक विभाकर पांडे की क़लम सुरों को अल्फ़ाज़ से नवाज़ती रही। भोजपुरी में लोक गीतों को जि़ंदा करने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। विभाकर के गीतों की लंबी फेहरिस्‍त में..फिल्म सत्या का यह गीत

"मोहब्बत कर गईल अखिया ना धड़कन के खबर लागल ....
ई रुपवा के असर ना ह पिरितिया कर गईल पागल"....

आज भी पत्नी-पत्नी के प्रेम का प्रमाण बना हुआ है। पिरितिया, पिया, अँखिया जैसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाले शब्द अपनेपन का अहसास दिलाते हैं। इसी फ़िल्म का एक और गीत

"*झुमका झुलनिया हार, हसुली नथूनिया चाहे कजरा के धार ,
तोहार एक मुस्कान हमार सोरहो सिंगार राजा सोरहो सिंगार* "


पति की अहमियत में सरल शब्दों में इससे अच्छी अभिव्यक्ति नहीं हो सकती। भले ही यह गीतकार विभाकर के नाम से मक़बूलियत हासिल किए हों, पर इनका व्यक्तित्व वास्तव में जीवन मे प्रकाश लाने वाला था।

1987 में इनका जन्म बिहार के सासाराम में हुआ था। विभाकर की गीतकार बनने की बचपन से ही दिली तमन्ना थी। एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले विभाकर के लिए ये ख़्वाब मुश्किल था, नामुमकिन नहीं और इसी ख़्वाब का दामन थामकर वो वाराणसी आ गए। 2016 में आई फ़िल्म साजन चले ससुराल-2 में उन्हें बतौर गीतकार काम करने का मौक़ा मिला, और यह फ़िल्म सुपरहिट साबित हुई। शोहरत की इमारत बनाने निकले विभाकर पांडे को बहुत कम समय तक फ़िल्म इंडस्ट्री मे संघर्ष करना पड़ा और 2017 मे प्रदर्शित फ़िल्म 'सत्या' के गीत 'मोहब्बत कर गईल अखिया ना धड़कन के खबर लागल ....
' ने उनकी शोहरत की इमारत की नींव रख दी। उन्होंने अपने सिने करियर में लगभग 300 फ़िल्‍मों के लिए गीत लिखे।


विभाकर जी की क़लम के कमाल से अनमोल गाने वजूद में आए, जिनका हर लफ़्ज़ जज़्बातों से लबरेज़ होता है। 'छुट जाये जग सब रब भले रुठे -कल्पना, जिये मरे के साथे ख ईली' कसम-पवन सिंह , नथुनिया दिवाना बना देले बा , लप लप करे कमरिया,आज पियवा से होई मिलानवा ,साचा में सचले रूप बा गजबे कमाल के,''तीर हमरा करेजवा के पार हो गईल' जैसे गीत उनकी कल्पना की किसी और दुनिया में ले जाते हैं।



रितेश पांडे को भोजपुरी का सितारा  बनाने में विभाकर जी का बड़ा योगदान रहा है। करूआ तेल' लप लप करे कमरिया' तीर हमरा करेजवा के पार हो गईल, नथुनिया दिवाना बना देले बा', पापा से परमिशन ,माई अदमी बना देलू काम के , क ईसे करी छठी के बरतिया , रोज रोक तावे रहिया सोनार राजा जी , जैसे गीत लिखकर उन्होंने रितेश पांडे को नए ख़िताब से नवाज़ा। विभाकर जी  की जोड़ी संगीतकार छोटे बाबा-अवनिश झा घँघरू के साथ ख़ूब जमी और इस जोड़ी ने कई दशकों तक श्रोताओं को एक से बढ़कर एक नग़में परोसे। ऐसी फिल्मों में सत्या, साजन चले ससुराल 2,बद्रीनाथ, बलमा बिहार वाला 2, राजा राजकुमार, चना जोर गरम, हथकडी़, जिद्दी, क्रेक फाईटर प्रमुख हैं। छोटे बाबा- घुंघरू के अलावा विभाकर के पसंदीदा संगीतकारों में मधुकर आनंद और आशीष बर्मा जैसे संगीतकार भी शामिल हैं।

इसके अलावा ''दर्द गीत ' जैसे गीतों ने अपने ज़माने में सुपर स्टार पवन सिंह को एक अलग पहचान दिलाई।


विभाकर पांडे  ने अपने गीतों से फ़िल्म सैकडो़ निर्माता-निर्देशक  की फ़िल्मों को हिट कराने में अहम योगदान दिया। जब तक विभाकर पांडे़ इस दुनिया में रहे, रितेश पांडे़ की फिल्मों के लिए गाने लिखते रहे। तीर हमरा करेजवा के पार हो गईल , करुआ तेल ? प्यार से भरपूर ये दोनों ही गाने ज़बरदस्त हिट साबित हुए। लगभग तीन दशक तक अपने गीतों से श्रोताओं को भाव विभोर करने वाले इंदीवर 5 जून 2019 को हमेशा-हमेशा के लिए दुनिया से रुख़सत हो गए और हमें ज़िंदगी और मौत का फ़र्क कुछ इस अंदाज़ में समझा गए...

'ज़िंदगी को बहुत प्यार हमने किया
मौत से भी मोहब्बत निभाएंगे हम
रोते-रोते ज़माने में आए मगर
हंसते-हंसते ज़माने से जाएंगे हम...

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